श्री क्षेत्र त्र्यंबकेश्वर - Guru Joshiji

श्री क्षेत्र त्र्यंबकेश्वर - श्री त्र्यंबकराज

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

              इस महामृत्युंजय जप के अधिष्टाता श्री क्षेत्र त्र्यंबकेश्वर के समान तीर्थस्थल पूरे भारतवर्ष मे शायद ही कही देखने को मिले | भारत मे बारा ज्योतिर्लिंग है | उसमे से दसवा है श्री त्र्यंबकेश्वर | बाकी ग्यारह ज्योतिर्लिंगोसे यह अनोखा है | इस पिंड मे अंगूठे के आकार के तीन लिंग है | ब्रम्हा, विष्णु और महेश ये तीन भगवान बाणलिंग रूप से यहा विराजमान है | सृष्टि को उत्पति, स्थिति और लय करवानेवाले यही तीन भगवान है | इस ज्योतिर्लिंग की उत्पति स्वयं ब्रम्हाजी ने शिवजी की आराधना करके की है इसलिये इसे आद्य ज्योतिर्लिंग ऐसे कहा जाता है | श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के उपर नैसर्गिक रूपसे गोदावरी की जलधारा से अहोरात्र अभिषेक होता है | ये साक्षात महामृत्युंजय भगवान होने के कारण इनके दर्शनमात्र ही से अपमृत्यु के भय और दोष से मुक्ति मिलती है | हर सोमवार के दिन यहा पालखी उत्सव होता है | त्र्यंबकेश्वर ये त्रिसंध्या क्षेत्र है | राम क्षेत्र, गुर्जर क्षेत्र और परशुराम क्षेत्र की सीमाए यही मिलती है | इसलिये ये त्रिसंध्या क्षेत्र माना गया है | पद्मपुराण के अनुसार -

यस्य जन्म सहस्त्रानां पुण्यं भवति संचितम् |

तस्यैव त्रम्बके गन्सुम बुद्धीर्भवती नान्यथा ||

जिसका सहस्त्रवधि जन्मो का पुण्य उसकी ही त्र्यंबकेश्वर क्षेत्रमे आने की इच्छा होती है | अन्यथा नहीं | त्र्यंबकेश्वर भगवान के मंदिर का जीर्णोद्धार पेशवा काल मे हुआ है | यह मंदिर वास्तुशात्र का उत्तम नमूना है | महाशिवरात्र और कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहा उत्सव मनाया जाता है |

*** गौतमी - गंगा गोदावरी ***

श्री क्षेत्र त्र्यंबकेश्वर ये तपोभूमि है | कृतयुग मे गौतम ऋषिजिका यहा आश्रम था | महर्षी गौतमजि को जब गोहत्या का पातक लगा तब इस पातक से मुक्ति पाने के लिये गौतम ऋषिजिने भगवान शिवजी की घोर तपस्या की और शिवजी को प्रसन्न किया | तब वरदान रूपमे अपने पाप के प्रायश्‍चित हेतु गौतम ऋषिजिने शिवजी के जटा मे स्थित गंगा मे स्नान करने की इच्छा प्रकट की | लेकिन गंगा शिवजी की जटासे उतरने को तैयार ही नहीं थी | तब क्रोधित होकर शिवजी ने अपनी जटा को पटककर गंगा का अवतरण पृथ्वी पर किया | अबभी ब्रम्हगीरि पर्वत पर शिवजी की जटा और घुटनो के निशान है | "गौतमस्या गाम् जीवनं ददाति इति गोदा" गौतमऋषि को गोहत्या के पाप से मुक्त करनेवाली गंगा का नाम गोदावरी हुआ है |

*** तीर्थराज कुशावर्त ***

शिवजी की जटासे निष्कासित होकर गंगा गोदावरी का प्रवाह तेज होकर बेहने लगा | इसकारण गौतमऋषि को गंगा मे स्नान करने मे दिक्कत हो रही थी | तब गोदावरी के प्रवाह को ऋषिजीने कुश याने दाभ से रोका | जहा गोदावरी को कुश से रोका उसी स्थान को कुशावर्त (कुश से आवर्तित) तीर्थ कहते है | गोवध के पातक से खिन्न गौतमऋषि ने सूर्यनारायण, अग्नि एवं ब्राम्हण के समक्ष इसी कुंड मे स्नान करके गोहत्या के पातकसे मुक्ति पाई | कुशावर्त कुंड को तीर्थराज ऐसा संबोधते है | वैसे तो चार कोनवाले कई तीर्थ इस भारतभूमि पर है पर षटकोणवाला तीर्थराज बस यही एक ही है | अज्ञानरूपी घोर अंधकार को नष्ट करनेवाला ज्ञान जहा से प्राप्त होता है वह स्थान है तीर्थराज कुशावर्त | गौतमऋषि के गोहत्या पाप का निवारण करनेवाला कुशावर्ततीर्थ आज भी हर स्नान करनेवाले श्रद्धालुका हर पापहरण करके सभी सभी बाधा से मुक्ति देती है | इसिलये त्र्यंबकेश्वर को मुक्तिभूमि भी कहा जाता है | त्र्यंबकेश्वर मे अहिल्या नदी को साथ लेकर गोदावरी नाशिक, नांदेड मार्ग से दक्षिणमे आंध्रप्रदेश मे राजमहेन्द्री नामक तीर्थस्थल मे समुद्रमे समाती है | इसीलिये इसे दक्षिणिगंगा ऐसे कहते है | दक्षिण दिशा पितरो की मानी जाती है | इसलिये गोदावरी के तट पर किया गया पितृकार्य पितरोतक पहुचता है | जब प्रभु श्री रामजी वनवासमे थे तब उन्होने लक्ष्मन एवं कश्यप ऋषि के साथ तीर्थराज कुशावर्त पर स्नान दान श्राद्धादि कर्म करके पुण्यसंचय किया | उस पुण्यसंचय के आधार पर दशरथ राजा की ब्रम्हहत्या के पातक से मुक्ति हुई |

*** सिंहस्थ कुंभमेला *** 

भारत मे चार तीर्थस्थलो पर हर बारा साल कुंभमेला होता है | जब सिंह राशि मे रवि एवं गुरु होता है तब श्री क्षेत्र त्र्यंबकेश्वर मे तीर्थराज कुशावर्त के तीर्थ मे कुंभमेला होता है | जिसमे नागा, निरंजणी, निर्वाणी, उदासी और निर्मल आखाड़ो के कई साधु संत सज्जन स्नान करके त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंगके दर्शन पाकर कृतार्थ होते है | अश्वमेध जैसे यज्ञ, लझ गोदान के फल के समान फल सिंहस्थ काल मे गोदावरी मे स्नान करने से प्राप्त होते है | इसके अलावा इस पुण्यभूमि मे ब्रम्हगीरि, गंगाद्वार, नील पर्वत जैसे पवित्र पहाड़, संतश्रेष्ट निवृत्तिनाथ महाराजजी की संजीवन समाधी, अहिल्या-गोदावरी संगम, ब्रम्हा-सावित्री मंदिर, गजानन महाराज आश्रम, स्वामी समर्थ मठ, मा 'अन्नपूर्णा' का आश्रम आदि स्थल वन्दनीय है |

सिंहस्थ कुंभमेला - सिंहस्थ कुंभ का महापर्वकाल एक साल का होता है | सन २०१५-२०१६ मे त्र्यंबकेश्वर तीर्थक्षेत्र मे कुम्भ का महापर्वकाल है | कुंभपर्व का प्रारंभ आषाढ़ कृ. त्रयोदशिसे याने मंगलवार १४ जुलाइ २०१५ को प्रातः ६ बजकर २१ मि. से होनेवाला है | और समाप्ति श्रावण शु. अष्टमी याने गुरुवार दि. ११ ऑगस्ट २०१७ सायं ५:५७ मि. को होनी है | इस एक साल के पर्वकाल मे र्यंबकेश्वर तीर्थक्षेत्र मे गंगा-पूजन, गंगाभेट, प्रायश्चित स्नान, कुम्भ्दान करना चाहिये | अपने पितरो के नामसे तीर्थश्राद्ध करना चाहिये | कुंभ पर्वकाल का पुण्यप्राप्त करने के लिये सुवर्णकी बृहस्पति की मूर्ति का दान करना चाहिये जिससे अपने पातकोका नाश होता है अपना शरीर एवं अंतःकरण शुद्ध होता है | बृहस्पतिका दान करने से सर्व ग्रहो का दोष परिहार होके इच्छित कार्यो मे सफलता प्राप्त होती है |

शाहीस्नान के मुहूर्त :

प्रथम शाहीस्नान - श्रावण शुक्ल पूर्णिमा - शनिवार २९ ऑगस्ट २०१५
द्वितीय शाहीस्नान - श्रावण कृष्ण अमावस्या - रविवार १३ सप्टेंबर २०१५
तृतीय शाहीस्नान - भाद्रपद शुक्ल द्वादशी - शुक्रवार २५ सप्टेंबर २०१५

 

 

 


मुहूर्त (Muhurt)

नारायण - नागबली (पितृदोष) पूजा के सन २०२३ - २०२४ (Narayan - Nagabali) Pooja 2023 - 2024

January 2023 - 4, 11, 22, 28

February 2023 – 4, 10, 19, 25

March 2023 - 4, 9, 18, 24
   
April 2023 – 2, 8, 14, 20

May 2023 – 17, 25, 30

June 2023 – 3, 8, 14, 24

July 2023 – 11, 18, 28

August 2023 – 2, 10, 17, 26

September 2023 – 4, 12

October 2023 – 1, 5, 8, 11, 28

November 2023 – 4, 19, 25, 30
 
December 2023 – 7, 14, 22, 27

January 2024 – 5, 13, 18, 26

February 2024 - 1, 9, 14, 22

March 2024 – 3, 13, 20, 26

कालसर्प योग (राहु - केतू) शान्तिक पूजा के सन २०२३ - २०२४ (KaalSarp - Ketu) Pooja 2023 - 2024

January 2023 – 1, 8, 13, 26, 30

February 2023 – 6, 12, 18, 27

March 2023 - 6, 11, 20, 26

April 2023 – 4, 10, 16, 22

May 2023 - 14, 19, 21, 27

June 2023 - 1, 5, 12, 16, 18, 26

July 2023 - 9, 13, 16, 23, 30

August 2023 – 6, 14, 16, 21, 28

September 2023 – 6, 10, 14, 17, 28

October 2023 – 7, 13, 21, 30

November 2023 – 6, 17, 24, 27

December 2023 – 2, 9, 17, 25, 29

January 2024 – 7, 15, 22, 28

February 2024 – 3, 11, 18, 24

March 2024 – 8, 11, 18, 28

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