कालसर्प योग - Guru Joshiji

राहू और केतु इन ग्रहो की वजह से कालसर्प योग बनता है | राहू को सर्प का मुख माना गया है और केतु को सर्प की पूछ | यदि कुंडलीमे राहू और केतु के बीच ज्यादातर ग्रह आते है तो कालसर्प योग होता है | वैदिक कर्मकाण्ड मे राहू की आदि देवता काल है और प्रत्यधिदेवता सर्प है | काल याने समय और सर्प याने साप | काल और सर्प के साथ राहू होने के कारण वो पापग्रह है | वेदोके अनुसार राहू का जन्म हिरण्य-कश्यपुकी पत्नी सिंहीकासे हुआ है | राहू को चन्द्र और सूर्य से भी बलवान माना है | इस कारण उनका शुभ या अशुभ परिणाम निश्चित तोर पर होता है | राहू यदि शुभस्थिति मे हो तो भाग्यदायक और पराक्रमी होता है | यदि दूषित स्थानो मे हो तो स्मृतिनाश, अपकीर्ति, पिशाच्चबाधा, संततिको कष्ट - अपाय करता है | हमेशा अपयश मिलता है | उद्योगव्यवसाय मे नुकसान होता है | नौकरीमे बढ़ोतरी मिलती नहीं | आरोग्य अच्छा नहीं रेहता और ऐसी व्यक्ति हमेशा धोका होता है | शिक्षा मे गुणवत्ता के अनुसार परिणाम नहीं मिलते | इन दोषो के परिहार हेतु कालसर्प योग शांतीका पूजन करवाना चाहिये | कालसर्प योग शांतीका पूजन करनेसे राहू और केतु के अशुभ परिणाम दूर होकर उनका शुभ फल मिलता है | कालसर्प दोष दूर करने के लिये शंकर भगवान की उपासना करनी चाहिये | इसकारण कालसर्प शांतीका पूजन त्र्यंबकेश्वर मे करना है | अतः पूजन का फल यहा शीघ्र मिलता है | यदि कुण्डलीमे राहू और केतु कालसर्प पूजन मे गणपति पूजन, पुण्याहवाचन, मातृकापूजन, नांदिश्राद्ध करके इस पूजन की प्रमुख देवता राहू और उपदेवता काल और सर्प के साथ नौ नागोकि प्राणप्रतिष्ठा करके विधिवत पूजा होती है | बाद मे नवग्रहो और रुद्रकलश का पूजन करके सभी देवताओके प्रति हवन किया जाता हे | अन्तमे बलिप्रदान और पूर्णाहूती होती है | यह विधि एक दिन मे संपन्न होता है | जन्मकुंडलीमे अनेक प्रकार कालसर्प दोष बनता है उसका विवरण -

अनंत कालसर्प योग 
जब लग्न में राहु और सप्तम भाव में केतु हो और उनके बीच समस्त अन्य ग्रह इनके मध्या मे हो तो अनंत कालसर्प योग बनता है । इस अनंत कालसर्प योग के कारण जातक को जीवन भर मानसिक शांति नहीं मिलती । वह सदैव अशान्त क्षुब्ध परेशान तथा अस्‍िथर रहता है: बुध्दिहीन हो जता है। मास्‍ि‍तक संबंधी रोग भी परेशानी पैदा करते है।

कुलिक कालसर्प योग
जब जन्‍मकुंडली के व्दितीय भाव में राहु और अष्टम भाव में केतू हो तथा समस्त उनके बीच हों, तो यह योग कुलिक कालसर्प योंग कहलाता है।

वासुकि कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के तीसरे भाव में राहु और नवम भाव में केतु हो और उनके बीच सारे ग्रह हों तो यह योग वास‍ुकि कालसर्प योग कहलाता है।

शंखपाल कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के चौथे भाव में राहु और दसवे भाव में केतु हो और उनके बीच सारे ग्रह हों तो यह योग शंखपाल कालसर्प योग कहलाता है।

पद्म कालसर्प योग 
जब जन्मकुंडली के पांचवें भाव में राहु और ग्याहरहवें भाव में केतु हो और समस्त ग्रह इनके बीच हों तो यह योग पद्म कालसर्प योग कहलाता है।

महापद्म कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के छठे भाव में राहु और बारहवें भाव में केतु हो और समस्त ग्रह इनके बीच कैद हों तो यह योग महापद्म कालसर्प योग कहलाता है।

तक्षक कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के सातवें भाव में राहु और केतु लग्न में हो तथा बाकी के सारे इनकी कैद मे हों तो इनसे बनने वाले योग को तक्षक कालसर्प योग कहते है।

कर्कोटक कालसर्प योग- g
जब जन्मकुंडली के अष्टम भाव में राहु और दुसरे भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य मे अटके हों तो इनसे बनने वाले योग को कर्कोटक कालसर्प योग कहते है।

शंखनाद कालसर्प योग  yog
जब जन्मकुंडली के नवम भाव में राहु और तीसरे भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य अटके हों तो इनसे बनने वाले योग को शंखनाद कालसर्प योग कहते है।

पातक कालसर्प योग 
जब जन्मकुंडली के दसवें भाव में राहु और चौथे भाव में केतु हो और सभी सातों ग्रह इनके मध्य मे अटके हों तो यह पातक कालसर्प योग कहलाता है।

विषाक्तर कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के ग्याहरहवें भाव में राहु और पांचवें भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य मे अटके हों तो इनसे बनने वाले योग को विषाक्तर कालसर्प योग कहते है।

शेषनाग कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के बारहवें भाव में राहु और छठे भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य मे अटके हों तो इनसे बनने वाले योग को शेषनाग कालसर्प योग कहते है।

मुहूर्त (Muhurt)

नारायण - नागबली (पितृदोष) पूजा के सन २०२३ - २०२४ (Narayan - Nagabali) Pooja 2023 - 2024

January 2023 - 4, 11, 22, 28

February 2023 – 4, 10, 19, 25

March 2023 - 4, 9, 18, 24
   
April 2023 – 2, 8, 14, 20

May 2023 – 17, 25, 30

June 2023 – 3, 8, 14, 24

July 2023 – 11, 18, 28

August 2023 – 2, 10, 17, 26

September 2023 – 4, 12

October 2023 – 1, 5, 8, 11, 28

November 2023 – 4, 19, 25, 30
 
December 2023 – 7, 14, 22, 27

January 2024 – 5, 13, 18, 26

February 2024 - 1, 9, 14, 22

March 2024 – 3, 13, 20, 26

कालसर्प योग (राहु - केतू) शान्तिक पूजा के सन २०२३ - २०२४ (KaalSarp - Ketu) Pooja 2023 - 2024

January 2023 – 1, 8, 13, 26, 30

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March 2023 - 6, 11, 20, 26

April 2023 – 4, 10, 16, 22

May 2023 - 14, 19, 21, 27

June 2023 - 1, 5, 12, 16, 18, 26

July 2023 - 9, 13, 16, 23, 30

August 2023 – 6, 14, 16, 21, 28

September 2023 – 6, 10, 14, 17, 28

October 2023 – 7, 13, 21, 30

November 2023 – 6, 17, 24, 27

December 2023 – 2, 9, 17, 25, 29

January 2024 – 7, 15, 22, 28

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