नारायण नागाबली - Guru Joshiji

नारायणबली और नागबली दोनो विधि काम्य है | फलप्राप्ति हो इस उद्देशसे यह विधि किये जाते है | अपने अतृप्त पितरोको तृप्त करके उन्हे सदगति दिलाना इस विधान का प्रमुख कारण है | जीवनकाल मे व्यक्ति की सभी इच्छाए पूरी नहीं होती | कुछ तीव्र इच्छा, वासना और इच्छाए मृत्युके पश्चात भी आत्मा का पीछा नहीं छोड़ती | आत्मा अग्निरूप होने के कारण वो स्वभाविक रूपसे सूर्य की ओर आकर्षित होता है | किन्तु वो इच्छा, वासनाए उस आत्मा को उसी वातावरण मे स्थित करके बहोत पीड़ाए देती है | परंतु आत्मा को मोक्ष की अपेक्षा होने के कारण और पीडाओसे मुक्ति के लिये अपने संबंधित व्यक्तियोको आर्थिक, मानसिक या शारीरिक रूपसे बाधा उत्पन्न करता है | जैसे रेडिओपर आवाज आती है या टेलेविजन पर दृश्य दिखाई देता है पर उसकी लेहरे हम देख नहीं सकते उसी प्रकार आत्मा अतिसूक्ष्म होने के कारण हम देख नहीं सकते | इसीलिये नारायणबली विधान करना चाहिये | इस विधीसे अदृश्य रूपसे उत्पन्न प्रेतपीड़ा, पिशाच्चपीड़ा, पितृदोष, सर्पशाप से उत्पन्न उपद्रव दृढ होता है | पुत्रसन्तती होती है | शारीरिक पीड़ा, संतती को होनेवाली पीड़ा दूर होकर आरोग्य प्राप्त होता है | उद्योग व्यवसाय मे आनेवाला अपयश, विवाहमे आनेवाली रुकावट दूर होती है | संक्षेपमे अनेक दोशोका परिहार होकर सौख्य प्राप्त होता हे | पितृदोष दूर होकर व्यक्ति की आर्थिक, मानसिक और शारीरिक उन्नति होती हे |

नारायणबली विधि करनेके कुछ प्रमुख कारण -

प्रेतयोनि या प्रेतपीड़ा - परद्रव्य (संपत्ति) का अपहार करनेसे अथवा कुछ वासना रेहनेसे जीवात्मा प्रेतयोनि मे जाता है | ऐसे अतृप्त आत्मा मृत्युके बाद अपने शरीर के साथ अथवा दूसरोके शरिरमे प्रवेश करके अपनी यातना बताते है तो कुछ उपद्रव देनेवाले होते है | उपद्रव देनेवाले आत्माओके वजहसे परिवार मे व्यक्ति बीमार रेहते है | धनसंचय नहीं होता | पुत्रसन्ततीका सौख्य नहीं मिलता | परिवार मे किसी के विचार मिलते नहीं और आपस मे झगड़े होते है |
दुरमरण या अपमृत्यु - शास्त्र ने ३६ प्रकारके मृत्यु को
दुरमरण बताया है | ब्रम्हचारी अवस्था मे, पानी मे डुबके, सर्पदंशसे, अग्नि के कारण, आत्महत्या या विषप्रशनसे, निसंतान अवस्थामे, अपघात या अपघातसे, अन्य देश मे मृत्यु आनेसे, पंचक, त्रिपाद या दक्षिणायन मे मृत्यु आनेसे, अपरात्रि अथवा शय्यपर गिरकर मृत्यु आनेसे इत्यादि दुरमरण बताये है | दुरमरण या अपमृत्युसे एखाद व्यक्ति गुजरती है तो अपने कुल मे पीड़ा देना शुरू करती है |
परागंदा व्यक्ति - घर की एखाद व्यक्ति न केहते निकल जाना, वो व्यक्ति जीवित है या मृत हो गयी है | उसने शादी की या बिना शादी के ही चल बसी है | आपको उस व्यक्ति के बारे मे कुछ जानकारी ना हो तो उसे परागंदा व्यक्ति केहते है | ऐसे परागंदा व्यक्ति के कारण परिवार को समस्या होती है |
प्रेतशाप - कुछ जन्मपत्रिका शापयुक्त होती है | बृहत्पराशारी ग्रंथ मे कुछ १४ शाप बताये है | उसमे पितृशाप,
प्रेतशाप अथवा सर्पशाप होते है | इन शापो की वजह से संततीसौख्य, शारीरिक, आरोग्य और धनसम्पदा मे कमी आती है |
पितृशाप -
१) लग्न मे या पंचम मे रवि, मंगल शनी अष्टम मे या व्यय स्थान मे गुरु हो तो | २) षष्तेश या नवमेश पंचम मे हो तो | ३) रवि पंचमेश होकर पंचम मे या नवम् मे शत्रुग्रहसे युक्त या दुष्ट हो तो | ४) मंगलके अंश मे पापग्रहसे युक्त अथवा दुष्ट पंचम मे नीच राशि का रवि या शनी हो तो | ५) पंचम भाव मे नीच राशि का रवि, शनी के नवमांश मे और रवि पाप ग्रह की कर्तरी मे हो तो |

नागबली

अगर एखाद व्यक्तिने अपने जीवन मे बहोत धन कमाया और उसपर उसपर उसकी आसक्ति रह गयी तो मृत होजाने के बाद वह नाग बनकर उस धनपर जा बैठता है | और उस द्रव्य का किसीको लाभ नहीं होते देता | ऐसे नाग की हत्या इस जन्म मे या जन्मांतर मे हो गयी तो उसका शाप मिलता है | इस शाप के कारण पुत्र संतती मे प्रतिबंध आ जाता है | और वात, पित्त, त्रिदोषजन्यज्वर, शुल, गंडमाल, कुष्ट, कंडु, नेत्रकर्णमूल, मुत्रकृच्छ आदि रोग उत्पन्न होते है | औषधि लेनेपर भी कुछ परिणाम नहीं होता | यदि ऐसा होता है तो समझ लीजिये की सर्प वध के कारण ही यह हो रहा है | इसके उपाय हेतु शौनक ऋषिजीने 'नागबली' यह विधि बताया है | नाग के कुछ आठ कुल है | सर्प, अनंत, शेष, कपिल, नाग, कुलिक, शंखपाल, भूधर ऐसे उनके नाम है | इनमेसे किसीकी भी यदि हत्या हो तो दोष उत्पन्न होता है |
          नागबली विधि का और एक कारण है के पृथ्वी पर नाग सबसे आयुष्यमान प्राणी है | सर्प योनि चिरंजीव है | अगर घराने मे किसीने नाग या सर्प जाने-अनजाने मे हत्या की है तो उस घराने मे किसी व्यक्ति को इस संबंधित कुछ सूचक स्वप्न दिख पड़ते है |

 

मुहूर्त (Muhurt)

नारायण - नागबली (पितृदोष) पूजा के सन २०२३ - २०२४ (Narayan - Nagabali) Pooja 2023 - 2024

January 2023 - 4, 11, 22, 28

February 2023 – 4, 10, 19, 25

March 2023 - 4, 9, 18, 24
   
April 2023 – 2, 8, 14, 20

May 2023 – 17, 25, 30

June 2023 – 3, 8, 14, 24

July 2023 – 11, 18, 28

August 2023 – 2, 10, 17, 26

September 2023 – 4, 12

October 2023 – 1, 5, 8, 11, 28

November 2023 – 4, 19, 25, 30
 
December 2023 – 7, 14, 22, 27

January 2024 – 5, 13, 18, 26

February 2024 - 1, 9, 14, 22

March 2024 – 3, 13, 20, 26

कालसर्प योग (राहु - केतू) शान्तिक पूजा के सन २०२३ - २०२४ (KaalSarp - Ketu) Pooja 2023 - 2024

January 2023 – 1, 8, 13, 26, 30

February 2023 – 6, 12, 18, 27

March 2023 - 6, 11, 20, 26

April 2023 – 4, 10, 16, 22

May 2023 - 14, 19, 21, 27

June 2023 - 1, 5, 12, 16, 18, 26

July 2023 - 9, 13, 16, 23, 30

August 2023 – 6, 14, 16, 21, 28

September 2023 – 6, 10, 14, 17, 28

October 2023 – 7, 13, 21, 30

November 2023 – 6, 17, 24, 27

December 2023 – 2, 9, 17, 25, 29

January 2024 – 7, 15, 22, 28

February 2024 – 3, 11, 18, 24

March 2024 – 8, 11, 18, 28

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